तुलसी गबार्ड(Tulsi Gabbard Biography)

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तुलसी गेबार्ड का जन्म 12 अप्रेल 1981 को अमेरिकन समोआ द्वीप समूह के लेलोआ लोआ में एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ. उनके पिता माइक गेबार्ड हवाई द्वीप समूह की राजनीति में एक जाना-माना नाम रहे हैं. तुलसी की मां कैरोल पोर्टर हैं.

जिन्होंने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया था. जब वे 1 वर्ष की थी तब गेबार्ड परिवार समोआ से अमेरिका आकर बस गया. तुलसी गेबार्ड विश्व हिन्दू कांग्रेस अध्यक्ष रही हैं और 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हो सकती है.

तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard )अमेरिकी राजनेता और यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी रिजर्व अधिकारी हैं. किसी ना किसी वजह से चर्चा में रहने वाली तुलसी अमेरिका की पहली कांग्रेस हिंदू सांसद हैं. कुछ समय पहले वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ नोक- झोंक की वजह से सुर्खियों में थीं. रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे विवाद में तुलसी गबार्ड पर रूस के हित में काम करने का भी आरोप लगा था. हालांकि तुलसी ने इन आरोपों से इंकार कर दिया था.

तुलसी गेबार्ड का प्रारंभिक जीवन

तुलसी गेबार्ड की परवरिश मिलेजुले धार्मिक परिवेश में हुई. उनके पिता कैथोलिक चर्च के अनुयायी होने के बाद भी भजन-कीर्तन में विशेष रूचि रखते थे. मां ने तो हिन्दू धर्म अपना लिया था. पारिवारिक माहौल से प्रभावित होकर गेबार्ड ने किशोरावस्था में हिन्दू धर्म अपना लिया.

उन्होंने हाई स्कूल तक की शिक्षा मुख्य रूप से अपने घर पर ही प्राप्त की और उसके बाद वर्ष 2009 में हवाई पैसेफिक यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर डिग्री हासिल की. उन्होंने अमेरिकी सेना में भी काम किया है और 2006 में इराक में तैनात रही.

तुलसी गेबार्ड का राजनीतिक जीवन

2011 से 2012 तक वे होनोलूलू की सिटी काउंसिल के लिए चुनी गई. 2012 में उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस की डिस्ट्रिक्ट सीट के लिए चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. वे अमेरिका की हाउस आॅफ रिप्रजन्टेटिव में सैन्य सेवाए और विदेशी मामलो की कमेटी की सदस्य हैं.

गेबार्ड 6 नवम्बर 2012 को अमेरिकी प्रतिनिधी सभा के लिए चुनी गई, जिसके बाद उन्होंने अमेरिकी सीनेट में हिन्दू धर्म ग्रंथ गीता को साक्षी मानकर शपथ लेकर इतिहास रचा. तुलसी गीता को अपना मार्गदर्शक ग्रंथ मानती हैं और अपने जीवन में सांमजस्य रखने के लिए गीता का नियमित पाठ करती हैं.

वर्ष 2016 में 1 लाख 40 हजार वोटो से जीत हासिल कर एक बार फिर अमेरिकी हाउस आफ रिप्रजन्टेटिव के लिए चुनी गई हैं.

2016 में अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयाॅर्कर और 2018 में पोलिटिको ने खबर दी कि गेबार्ड 2020 में राष्ट्रपति पद की दावेदारी के लिए खुद को तैयार कर रही हैं. माना जा रहा है कि अगले वर्ष तक इसकी औपचारिक घोषणा भी वे कर सकती हैं. अगर उन्हें यह मौका मिलता है तो वे पहली हिन्दू होंगी जो अमेरिका की किसी प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनेंगी

भारत पर तुलसी गेबार्ड का रूख

तुलसी गेबार्ड भारत के साथ अमेरिका के मजबूत संबंधों की पक्षधर हैं और भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बड़ी प्रशंसक हैं. वे नरेन्द्र मोदी को एक ऐसा नेता मानती है जिनसे दुनिया भर के जन प्रतिनिधि समर्पण और निष्ठा भाव की प्रेरणा ले सकते हैं. 28 सितम्बर 2016 को जब नरेन्द्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे तो उन्होंने गीता की अपनी निजी प्रति उन्हें भेंट की.

मां ने अपना लिया था हिंदू धर्म, पिता थे कैथोलिक

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, तुलसी गबार्ड का जन्म अमेरिकी सेमोन वंश के एक परिवार में हुआ था जो अमेरिकी राज्य हवाई के मूल निवासी हैं. उनके पिता एक कैथोलिक थे और उनकी मां हिंदू धर्म में परिवर्तित हो गई थीं. तुलसी गबार्ड ने भी हिंदू धर्म अपनाया है. वो भारत और अमेरिका के बीच बेहतर रिश्ते की वकालत करती रही हैं. उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री बनने पर मोदी को बधाई भी दी थी.

US की पहली हिंदू महिला सांसद तुलसी गबार्ड ने छोड़ी बाइडेन की पार्टी, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

US की पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड ने मंगलवार को डेमोक्रेटिक पार्टी से इस्तीफा दे दिया. पार्टी छोड़ते वक्त उन्होंने टॉप नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी एक तरह से सियासी नफा-नुकसान देखने वाला एलीट क्लब बनकर रह गई है. गबार्ड 2013 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए हवाई से चुनी जाने वाली पहली हिंदू थीं.

पहली हिंदू अमेरिकी सांसद तुलसी गबार्ड ने मंगलवार को अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने घोषणा की कि वह सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़ रही हैं और पार्टी को युद्ध-प्रचारकों का अभिजात्य वर्ग कहा. बता दें कि 41 वर्षीय गबार्ड पिछले साल ही प्रतिनिधि सभा से रिटायर हुईं थीं. हालांकि, उन्होंने अपने अगले कदम के बारे में अभी किसी को जानकारी नहीं दी है

डेमोक्रेट्स पर लगाए नस्लभेद के आरोप

गबार्ड ने एक ट्वीट में कहा कि मैं आज की डेमोक्रेटिक पार्टी में नहीं रह सकती. तुलसी के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी एक तरह से सियासी नफा-नुकसान देखने वाला एलीट क्लब बनकर रह गई है

भारतीय मूल की नहीं हैं अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार तुलसी गबार्ड, सामने आई यह बात

अमेरिकन कांग्रेस की पहली हिंदू सांसद और डेमोक्रेट पार्टी से राष्ट्रपति पद की दावेदार तुलसी गबार्ड के बारे में कहा जाता है कि वह भारतीय मूल की हैं। वह भारतीय-अमेरिकी तबके में खासी लोकप्रिय भी हैं। तुलसी गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिका के लेलोआलोआ में हुआ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका के दौरे के दौरान तुलसी गबार्ड ने भी प्रधानमंत्री मोदी का अमेरिका में स्वागत किया था और उन्होंने 22 सितंबर को हाउडी मोदी कार्यक्रम में शामिल न हो पाने को लेकर माफी मांगी थी। 38 साल की गबार्ड अमेरिकी कांग्रेस की पहली हिंदू महिला हैं। गबार्ड चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह कांग्रेस सदस्यों के उस समूह का हिस्सा थीं जिसने 2016 में प्रधानमंत्री मोदी का तब स्वागत किया था जब उन्होंने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था।

गबार्ड भारत और अमेरिका के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने की वकालत करती रही हैं। उन्होंने 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर मोदी को बधाई दी थी। वह अमेरिका की पहली हिंदू महिला हैं जो राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने वाली हैं। वह हिंदू अमेरिकियों के बीच काफी मशहूर हैं। इसलिए उनके बारे में कहा जाता है कि वह भारतीय मूल की हैं।

डेट्रॉयट में बहस के दौरान तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वह देशभक्त की तरह बर्ताव नहीं कर रहे हैं। गबार्ड का यह बयान ट्रंप के उस ट्वीट के बाद आया था, जिसमें उन्होंने चार डेमोक्रेट महिलाओं पर नस्लीय टिप्पणी की थी।

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